Tuesday, December 10, 2019

Citizenship Bill introduced in LS amid opposition’s objection

The government on Monday introduced the controversial Citizenship (Amendment) Bill, 2019 in the Lok Sabha despite objection raised by the opposition parties calling the move “fundamentally unconstitutional” and “violation” of Article 14 of the Indian constitution and others.



Following over an hour debate on Bill’s legislative competence if it can be taken or not, the lower House allowed it after the division of votes with 293 in its favor and 82 against.

Introducing the Bill, Union Home Minister Amit Shah rejected allegations of opposition members, saying “I assure that the Bill does not violate any Article of the Indian Constitution and that any citizen will not be deprived of their rights”.
“Every citizen has been given place in the Bill on the basis of reasonable classification.”

He said that the Bill seeks to provide Indian nationality to Hindus, Christians, Sikhs, Parsis, Jains and Buddhists fleeing persecution in Pakistan, Afghanistan, and Bangladesh.

The Minister said that the Bill has been introduced after analyzing the constitution of Pakistan, Afghanistan, and Bangladesh.

Referring to the Nehru-Liaquat agreement signed in 1950 after the partition of India and Pakistan, Shah said it was agreed to protect the rights of minorities but only India followed it but Hindus, Christians, Sikhs, Parsis, Jains, and Buddhists faced atrocities in Pakistan, Afghanistan, and Bangladesh.

“The Bill is for those minorities who faced religious persecution in Pakistan, Afghanistan, and Bangladesh.”

The Minister clarified as the Muslim community was not persecuted in the three Islamic countries, the Bill specifically mentions to provide citizenship to six religious persecuted minorities.

“The people of the six minority communities who migrated to India following religious persecution in Pakistan, Bangladesh, and Afghanistan will be given Indian citizenship as per this Bill. They are being given citizenship on the basis of reasonable classification. The Bill does not violate Article 14 of the Indian Constitution.”

But, Shah said, the Bill is not against the Muslim community and that if any Muslim seeks citizenship in India based on rules he will be entertained as per the Article of the Bill.

Major opposition parties, including Congress, Trinamool Congress, Revolutionary Socialist Party, Dravida Munnetra Kazhgam, All India Majlis-e-Ittehad-ul-Muslimeen, and Indian Union Muslim League, opposed the Bill citing various Articles of Indian Constitution.


Thursday, November 21, 2019

महाराष्ट्र में शिवसेना संग बनायेंगे सरकार हम: कांग्रेस-राकांपा

नयी दिल्ली 20 नवम्बर (वार्ता) कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने बुधवार को घोषणा की कि वे महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ यथाशीघ्र एवं यथासंभव गठबंधन सरकार बनायेंगे।



कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने यहां राकांपा प्रमुख शरद पवार के आवास पर कांग्रेस और राकांपा नेताओं की बैठक के बाद संवाददातओं से यह बात कही। बैठक में कांग्रेस के अहमद पटेल, मल्लिार्जुन खड़गे, जयराम रमेश, के सी वेणुगोपाल, बालासाहेब थोराट तथा राकांपा के अजीत पवार, सुप्रिया सुले, नवाब मलिक और अन्य नेता मौजूद थे।

श्री चौहान ने कहा, “ राकांपा और कांग्रेस ने गठबंधन सरकार के गठन के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया है। आज हमारे बीच लंबी और बहुत उपयोगी चर्चा हुई तथा कुछ पहलुओं पर अभी भी चर्चा की जानी है।”

श्री मलिक ने कहा कि कांग्रेस और राकांपा नेताओं ने परस्पर निर्णय लिया है कि वे महाराष्ट्र में वैकल्पिक सरकार का गठन करेंगे। उन्होंने कहा, “राकांपा-कांग्रेस-शिवसेना के एक साथ आए बिना यह संभव नहीं है। हम सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए बेहतर प्रयास कर रहे हैं। हम यथाशीघ्र और यथासंभव वैकल्पिक सरकार बनायेंगे।”

कांग्रेस और राकांपा के राष्ट्रीय नेताओं ने श्री पवार और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ कई बैठकें की है। श्रीमती गांधी ने शिवसेना के साथ गठबंधन के लिए मंजूरी दे दी है , हालांकि उन्होंने सजगता के साथ कदम उठाने के भी निर्देश दिए हैं।



 

Friday, November 15, 2019

बिरसा मुंडा जयन्ती एवं झारखण्ड स्थापना दिवस पर चहुंओर गहमा-गहमी

झारखण्ड के क्रांतिकारी सपूत भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती एवं झारखण्ड राज्य के 20वें स्थापना दिवस पर आज 15 नवम्बर को पूरे राज्य में गहमागहमी बनी हुई है। राज्य में आम नागरिकों सहित सरकार एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा भी विविध आयोजनों के माध्यम से बिरसा मुण्डा को श्रद्धांजलि दी गयी और सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही राज्य स्थापना के उपलक्ष्य में विविध सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर राज्य के विकास की परिकल्पना को सार्थक करने के सवाल पर विचार-विमर्श किए गए।




झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस अवसर पर बिरसा मुण्डा के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए राज्य के विकास के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की है और समस्त नागरिकों को राज्य गठन के उपलक्ष्य में शुभकामना दी है।
झारखण्ड स्थापना दिवस पर आज यहां मोरहाबादी मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इससे पूर्व झारखण्ड की राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू एवं मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बिरसा मुण्डा के समाधि स्थल पर पहुंच कर माल्यार्पण किया। 


मुख्यमंत्री ने धरती आबा को दी श्रद्धांजलि


झारखंड स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शुक्रवार को कोकर के डिस्टलरी स्थित भगवान बिरसा मुंडा की समाधि स्थल व उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर धरती आबा को नमन किया। मुख्यमंत्री ने राज्य स्थापना दिवस पर झारखंडवासियों को शुभकामनाएं दीं।उन्होंने ट्विटर पर लिखा- झारखंड राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई। अटल जी ने हमें अलग राज्य की सौगात दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड की हर जरूरत का ख्याल रखा। 


आज झारखंड लगातार विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। आइए पुन: झारखंड के विकास का और संस्कृति तथा परंपरा की रक्षा का संकल्प लें।रांची के सांसद संजय सेठ, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय सहित अन्य भाजपा नेताओं ने भी भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।उल्लेखनीय है कि झारखंड स्थापना दिवस के साथ भगवान बिरसा मुंडा की भी आज 144 वीं जयंती है। हालांकि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण प्रशासनिक स्तर पर कोई विशेष आयोजन नहीं किया जा रहा है।  

राज्यपाल ने भगवान बिरसा को दी श्रद्धांजलि 

झारखंड स्थापना दिवस पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कोकर के डिस्टलरी स्थित भगवान बिरसा मुंडा की समाधि स्थल एवं उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। राज्यपाल ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 144 वीं जयंती और झारखंड स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। मौके पर मुख्य सचिव डॉ. डीके तिवारी ने भी धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की।



Friday, November 8, 2019

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : अयोध्या में विवादित स्थल पर बनेगा राम मंदिर, मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन

नयी दिल्ली, 09 नवम्बर (वार्ता) अयोध्या के करीब पांच सौ साल पुराने विवाद में 206 साल के बाद शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक को लेकर चल रहा विवाद करीब 500 साल पुराना है। माना जाता है कि इस विवाद की शुरुआत 1528 में तब हुई थी जब मुगल शासक बाबर ने राम मंदिर को गिराकर वहां मस्जिद का निर्माण कराया था। इसी वजह से इसे बाबरी मस्जिद कहा जाने लगा था। विवादित स्थल पर हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों में मालिकाना हक का विवाद सबसे पहले 1813 में शुरू हुआ था।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ ने शनिवार को इस संवेदनशील मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

शीर्ष अदालत ने गत 16 अक्टूबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। प्राचीन इतिहास के पन्नों को पलटते हुए, धार्मिक मान्यताओं एवं परम्पराओं तथा पुरातात्विक सवालों पर विचारोत्तोजक बहस के बीच अयोध्या की विवादित जमीन से संबंधित मुकदमे पर 40 दिन तक जिरह होने के बाद इस ऐतिहासिक सुनवाई का उस दिन पटाक्षेप हो गया था और पूरे देश को फैसले का इंतजार था।

भारतीय राजनीति पर तीन दशक से अधिक समय से छाये इस विवाद की सुनवाई के दौरान राम जन्मभूमि पर अपने दावे के पक्ष में जहां रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा, ऑल इंडिया हिन्दू महासभा, जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति एवं गोपाल सिंह विशारद ने दलीलें दी, वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड, हासिम अंसारी (मृत), मोहम्मद सिद्दिकी, मौलाना मेहफुजुरहमान, फारुख अहमद (मृत) और मिसबाहुद्दीन ने विवादित स्थल पर बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक का दावा किया।

इस मामले में शीर्ष अदालत की ओर से न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल की ओर से मध्यस्थता असफल रहने की बात बताये जाने के बाद संविधान पीठ ने नियमित सुनवाई की और सभी पक्षों को अपना-अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिये।

हिन्दू पक्ष की ओर से सबसे पहले ‘रामलला विराजमान’ के वकील के एस परासरण ने दलीलें शुरू की थी, जबकि सुनवाई का अंत सुन्नी वक्फ बोर्ड की जिरह से हुआ। चालीस दिन की सुनवाई के दौरान कई मौके ऐसे आये जब दोनों पक्षों के वकीलों में गर्मागर्म बहस हुई।

दरअसल उच्चतम न्यायालय में अयोध्या विवाद की सुनवाई न्यायिक इतिहास की दूसरी सबसे लंबी सुनवाई बन गयी। इससे पहले आधार की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई 38 दिनों तक चली थी जबकि 68 दिनों की सुनवाई के साथ ही केशवानंद भारती मामला पहले पायदान पर बना हुआ है।

वर्ष 1973 में ‘केशवानंद भारती बनाम केरल’ के मामले में उच्चतम न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपने संवैधानिक रुख में संशोधन करते हुए कहा था कि संविधान संशोधन के अधिकार पर एकमात्र प्रतिबंध यह है कि इसके माध्यम से संविधान के मूल ढांचे को क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। ‘केशवानंद भारती बनाम केरल’ के मामले में 68 दिन तक सुनवाई हुई, यह तर्क-वितर्क 31 अक्टूबर 1972 को शुरू होकर 23 मार्च 1973 को खत्म हुआ था।

आधार की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीर्ष कोर्ट में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई की थी। इस बेंच में न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल थे। आधार मामले में 38 दिनों तक चली सुनवाई के बाद गत वर्ष 10 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, जबकि इस पर गत वर्ष सितंबर में फैसला सुनाया गया था। इस मामले में विभिन्न सेवाओं में आधार की अनिवार्यता की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी।

मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि यदि मस्जिद के लिए बाबर द्वारा इमदाद देने के सबूत नहीं हैं, तो सबूत राम मंदिर के दावेदारों के पास भी नहीं है, सिवाय कहानियों के। मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वकील राजीव धवन ने दलील दी कि 1855 में एक निहंग वहां आया, उसने वहां गुरु गोविंद सिंह की पूजा की और निशान लगा दिया था। बाद में सारी चीजें हटाई गईं। उसी दौरान बैरागियों ने रातोंरात वहां बाहर एक चबूतरा बना दिया और पूजा करने लगे। उन्होंने बाबर की इमदाद के संबंध में उक्त बात तब कही थी जब संविधान पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने पूछा था कि क्या इस बात का कोई सबूत है कि बाबर ने भी मस्जिद को कोई इमदाद दी हो?

श्री धवन ने कहा था कि ब्रिटिश हुकूमत के गवर्नर जनरल और फैज़ाबाद के डिप्टी कमिश्नर ने भी पहले बाबर के फरमान के मुताबिक मस्जिद की देखभाल और रखरखाव के लिए रेंट फ्री गांव दिए, फिर राजस्व वाले गांव दिए। आर्थिक मदद की वजह से ही दूसरे पक्ष का ‘प्रतिकूल कब्जा’ नहीं हो सका था। सन् 1934 में मस्जिद पर हमले के बाद नुकसान की भरपाई और मस्जिद की साफ-सफाई के लिए मुस्लिमों को मुआवजा भी दिया गया था।

उन्होंने दलील दी थी कि शीर्ष अदालत अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपरिहार्य शक्तियों के तहत दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को ध्यान में रखकर इस मामले का निपटारा करें। उन्होंने कहा था कि मस्जिद पर जबरन कब्जा किया गया। लोगों को धर्म के नाम पर उकसाया गया, रथयात्रा निकाली गई, लंबित मामले में दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि मस्जिद ध्वस्त की गई और तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को अवमानना के चलते एक दिन की जेल भी काटनी पड़ी थी।

मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा था कि कोई भी अयोध्या को राम के जन्म स्थान के रूप में अस्वीकार नहीं कर रहा है। यह विवाद बहुत पहले ही सुलझ गया होता अगर यह स्वीकार कर लिया जाता कि राम केंद्रीय गुंबद के नीचे पैदा नहीं हुए थे। हिंदुओं ने जोर देकर कहा है कि राम केंद्रीय गुंबद के नीचे पैदा हुए थे। सटीक जन्म स्थान ही मामले का मूल है।

मुस्लिम पक्ष ने हिन्दू पक्ष के इस दावे का खंडन भी किया था कि बाबरी मस्जिद इस्लाम के स्थापित नियमों के खिलाफ थी, साथ ही उसने कहा था कि मोहरहित ‘निर्मोही’ और बैरागी को जमीन से मोह क्यों? मुस्लिम पक्षकार के वकील मोहम्मद निज़ाम पाशा ने कहा कि बाबरी मस्जिद वैध मस्जिद थी या नहीं, वहां वजू करने की व्यवस्था थी या नहीं, इसे इस्लाम के सिद्धांतों पर परखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सिर्फ यह देखे जाने की जरूरत है कि वहां के लोग इसे मस्जिद मानते थे या नहीं।

हिन्दू पक्ष की दलील थी कि बाबरी मस्जिद में वज़ू करने की कोई जगह नहीं थी। उन्होंने जमाली कमाली मस्जिद, सिद्धि सईद मस्जिद का उदाहरण देते हुए कहा था कि उस मस्जिद में कोई गुम्बद नहीं है, पर जाली लगी हुई है जिसे ‘ट्री ऑफ लाइफ’ कहते हैं। यही नहीं वहां पर जो नक्काशी है उसमें पेड़ और फूल बने हुए हैं। हिन्दू पक्ष की यह भी दलील है कि विवादित जमीन की खुदाई में ढांचे के जो अवशेष मिले हैं उसमें पेड़ और फूल बने हैं जो मस्जिदों में नहीं होते।

एक मुस्लिम पक्ष ने कहा कि हिन्दुओं के पास केवल राम चबूतरे का अधिकार है। मोहम्मद फारुख की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नाफडे ने संविधान पक्ष के समक्ष कहा था कि हिन्दुओं के पास उस स्थान का सीमित अधिकार है।

हिन्दुओं के पास चबूतरे का अधिकार तो है, लेकिन वे स्वामित्व हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि हिंदुओं की ओर से लगातार अतिक्रमण की कोशिश की गई।
इससे पहले मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि एएसआई रिपोर्ट ऑपिनियन और अनुमान पर आधारित है। पुरातत्व विज्ञान, भौतिकी और रसायन विज्ञान की तरह विज्ञान नहीं है। प्रत्येक पुरातत्व विज्ञानी अपने अनुमान और ओपिनियन के आधार पर नतीजा निकलता है।


Source: Trusted Online News Portals in India


Bihar News Patna | Latest Jharkhand News in Hindi|Entertainment News India |Top Environment News | 

Friday, October 25, 2019

विधानसभा चुनाव : महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन बहुमत, हरियाणा में ‘त्रिशंकु’ विधानसभा के आसार, खट्टर ने राज्यपाल से मांगा मिलने का समय

मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की मतगणना जारी है। कुल 288 सीटों में से अब तक 169 सीटों के नतीजे घोषित किए जा चुके हैं। भाजपा-शिवसेना गठबंधन 95 सीटें जीत चुका है, जबकि 59 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस-राकांपा गठबंधन अब तक 63 सीटों पर जीत दर्ज कर चुका है, जबकि 48 सीटों पर आगे है। अन्य दलों व निर्दलीयों ने अब तक 11 सीटें जीती हैं।




 मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर दक्षिण-पश्चिम से चुनाव जीत गए हैं। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. आशीष देशमुख को 36 हजार से अधिक मतों से पराजित किया। शिवसेना उम्मीदवार आदित्य ठाकरे मुंबई की वर्ली सीट से चुनाव जीत गए हैं। उन्होंने राकांपा उम्मीदवार सुरेश माने को 67,427 मतों से हराया।


फडणवीस सरकार के पांच मंत्री चुनाव हारे हैं। भाजपा उम्मीदवार एवं राज्य की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे परली सीट से चुनाव हार गयी हैं। उनको राकांपा उम्मीदवार एवं विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष धनंजय मुंडे ने 30 हजार से अधिक मतों से पराजित किया।


 फडणवीस सरकार के जो पांच मंत्री चुनाव हारे हैं उनमें पंकजा मुंडे, राम शिंदे, विजय शिवतारे, अर्जुन खोतकर व बाला भेगड़े शामिल हैं। विधानसभा उपाध्यक्ष विजयकुमार औटी भी चुनाव हार गए हैं।


कोथरूड सीट पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील भी चुनाव जीत गए हैं। पाटील को 54.07 प्रतिशत मत मिले। उन्होंने मनसे उम्मीदवार किशोर नाना शिंदे को 25 हजार से ज्यादा मतों से हराया। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राकांपा उम्मीदवार अजित पवार बारामती सीट से चुनाव जीत गए हैं। उनको कुल 83.24 प्रतिशत मत मिले। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार गोपीचंद कुंडलीक पडलकर को 165,265 मतों से पराजित किया।

पिछली बार भाजपा-शिवसेना अलग-अलग लड़ी थीं। इस बार दोनों का गठबंधन है। वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा 122 और शिवसेना 63 सीटें जीती थीं।

बीड़ जिले की परली विधानसभा सीट से राज्य सरकार की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे चुनाव हार गयी हैं। पंकजा को उनके चचेरे भाई राकांपा उम्मीदवार धनंजय मुंडे ने करीब 30 हजार से ज्यादा मतों से पराजित किया। धनंजय राज्य विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। धनंजय को 1,22,114 मत मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी पंकजा को 91,413 मत से ही संतोष करना पड़ा। पंकजा भाजपा के कद्दावर नेता दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं।
हरियाणा: भाजपा सबसे बड़ा दल लेकिन बहुमत से दूर

चंडीगढ़ । हरियाणा के चुनाव परिणाम में किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के बाद प्रदेश की राजनीति में अब जोड़तोड़ का खेल शुरू हो गया है। भाजपा 38 सीटों पर, कांग्रेस 33 पर आगे, जजपा के 10 प्रत्याशी आगे। चुनाव परिणाम के तुरंत बाद ही यह खेल शुरू हो चुका है। भाजपा और कांग्रेस ने जहां जननायक जनता पार्टी और निर्दलीय विधायकों पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं वहीं पर्दे के पीछे होने वाला खेल भी इसके साथ ही शुरू हो गया है।

90 विधायकों वाली हरियाणा विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 46 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए भाजपा व कांग्रेस दोनों को ही विधायकों का बहुमत जुटाना पड़ेगा। इसके लिए जोड़तोड़ शुरू हो गया है।


भाजपा ने जहां एनडीए के सबसे वरिष्ठ नेता पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से आग्रह किया है कि वह दुष्यंत चौटाला और अभय चौटाला को भाजपा को समर्थन देने के लिए राजी करें वहीं कांग्रेस की तरफ से इस मामले में पहल करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा को छोडक़र सभी राजनीतिक दलों के विधायकों को आह्वान किया है कि भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए सभी एकजुट होकर महागठबंधन के बैनर तले नई सरकार का गठन करें।


हुड्डा ने इनेलो, जजपा, हलोपा व निर्दलीय विधायकों को एकजुट होने का आह्वान किया है। हालांकि जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला ने कोई भी राजनीतिक फैसला लेने के लिए शुक्रवार को दिल्ली में सभी विधायकों की बैठक बुला ली है। इस बैठक में कांग्रेस या भाजपा को समर्थन देने के संबंध में फैसला किया जाएगा।

इसी दौरान इनेलो नेता एवं ऐलनाबाद से विधायक बने चौधरी अभय सिंह चौटाला ने हुड्डा के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि इनेलो कभी भी कांग्रेस का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने षड्यंत्र के तहत इनेलो सुप्रीमो चौधरी ओमप्रकाश चौटाला और अजय सिंह चौटाला को जेल की सजा करवाई थी। जिस पार्टी ने इस प्रकार का षड्यंत्र करते हुए उसके शीर्ष नेताओं को झूठे केस में फंसाकर सजा दिलवाई हो, उसे इनेलो एवं उसके कार्यकर्ता कभी भी माफ नहीं कर सकते।




Monday, October 14, 2019

Modi-Xi agree to promote mutual learning among their civilisations

Chinese President Xi Jinping and Indian Prime Minister Narendra Modi have agreed to promote exchanges and mutual learning among civilizations to achieve joint development and prosperity during their second informal summit in Mahabalipuram, Tamil Nadu, a Xinhua report said.

Xi and Modi held their second informal meeting in the picturesque Southern Indian town following their first in the central Chinese city of Wuhan in April 2018.

During Xi’s trip from his hotel in Chennai to Mahabalipuram, people from all walks of life lined the streets waving Chinese and Indian national flags, with young men and women in Indian traditional costumes singing and dancing, to welcome the Chinese President for his visit.

Xi recalled his successful meeting with Modi in Wuhan last year, which brought China-India relations into a new stage, and said that he was delighted to visit the state of Tamil Nadu to further learn about the country.

The two leaders held an extensive talk during the tour of the Mahabalipuram monuments “on dialogue and mutual learning among civilizations”.

Tamil Nadu, a maritime transit hub for cargoes in the ancient Silk Road, has a long history of exchanges with China and close connections with Beijing on maritime trade since ancient times, Xi said.

Both ancient civilizations with several thousand years of history, China and India have carried on their exchanges and mutual learning till this day, Xinhua news agency quoted the Chinese President as saying.

The two countries’ ancestors have overcome various obstacles to carry out extensive exchanges and promote the development of literature, art, philosophy, and religion, which have greatly benefited both sides, Xi said.

Noting that China-India cultural and people-to-people exchanges bear great potential, Xi urged both countries to take the 70th anniversary of China-India diplomatic relations next year as an opportunity to conduct broader and deeper cultural and people-to-people exchanges.

He also called on the two countries to jointly advocate and push forward dialogue and exchanges among different civilizations, so as to inject a more lasting driving force into the development of bilateral ties and continue to produce new glory for Asian civilizations.

The two leaders agreed that China and India should respect and learn from each other so as to jointly achieve common development and prosperity, as well as the great rejuvenation of the two civilizations, Xinhua added.


Source: Trusted Online News Portals in India


Bihar Online News Portal In Hindi | Latest Jharkhand News in Hindi |Entertainment News India | 

Thursday, October 10, 2019

Apple starts selling Microsoft’s Xbox controller

Apple has started selling Microsoft’s Xbox Wireless Controller in its online stores, after adding support for the gamepad in the latest software updates for iPhone, iPad, Apple TV and the Mac.

The controller, spotted by MacRumors on Wednesday, costs $59.95. It is now available on both Apple’s and Microsoft’s websites.

As of now, Sony’s DualShock 4 has not appeared on Apple.com.



The Cupertino-based company has also introduced support for the PlayStation 4’s gamepad with iOS 13, iPadOS, tvOS 13 and macOS Catalina.

According to earlier reports, Microsoft was expected to introduce a mini Xbox priced around $60, especially for its Project xCloud.

Project xCloud is a vision for game-streaming technology that was introduced in October 2018 to complement Microsoft’s console hardware and to give gamers more choices.

The tiny box would be designed to make it easier for users to connect their Xbox controller to TVs and offer minimal processing power itself.

Source: Trusted Online News Portals in India


Bihar News | Latest Jharkhand News in Hindi