Friday, June 12, 2020

योगा से प्राप्त आन्तरिक सौंदर्य बाहरी सौंदर्य को निखारता है: शहनाज हुसैन

"सुन्दर चमकीली त्वचा, गठीला शरीर, छरहरा बदन, चेहरे पर यौवनता, चमकीले बाल तथा प्राकृतिक रूप से सुन्दर दिखने की चाहत में आज कल पिफटनेस सैन्टरों, जिम, सैलून, स्पा तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मंहगे सौदर्य प्रसाधनों को खरीदने की होड़ आम देखी जा सकती है।"


 
आज कल के प्रदूषण, तनाव, लाइफ स्टाइल तथा दिन रात की भागदौड़ भरी जिन्दगी से आप समय से पहले ही बूढ़े दिखने लगते हैं तथा युवा उम्र में ही चेहरे पर झुर्रियां, कील मुहांसे, फुंसियां, काले धब्बे लगातार परेशानी का सबब बन जाते हैं, अधिकांश लोग सूंदर दिखने की लालसा क्या क्या नहीं कर देते लेकिन फिर भी ब्यूटी सैलूनों में घण्टों फेयरनेस ट्रीटमेंट तथा कॉस्मेटिक पर भारी खर्च करने के बाद भी चेहरे का निखार कुछ दिनों बाद ही गायब हो जाता है। ऐसे में लोग उदास होकर दिल तोड़ बैठते हैं तथा उन्हें लगता है की सुंदरता तो बिरासत में ही मिलती है।


लेकिन कया आप जानते हैं की अगर आप शारीरिक रूप से सुन्दर हैं तो आपका सौन्दर्य चेहरे पर स्वभाबिक रूप से झलकेगा। कुछ योग आसनों के नियमित अभ्यास से आप प्राकृतिक सुन्दरता, दमकती त्वचा तथा शारीरिक आकर्षण ग्रहण कर सकते है। वास्तव में अगर आप योग साधना को अपने जीवन से जोड़ लें तो शरीर को स्वस्थ्य रखने के साथ ही प्रकृतिक तौर पर स्थाई रूप से सुन्दर तथा प्रभावशाली भी बनाया जा सकता है तथा महंगे सौन्दर्य प्रसाधनों, ब्यूटी सैलूनों के महंगे उपचार तथा समय को बचाया जा सकता है।


भारतीय आर्युवैदिक पद्धति योग के साधारण आसनों के जरिए आप स्थाई आन्तरिक तथा बाहरी सौन्दर्य मुफत में आसानी में पा सकते है। प्रतिदिन महज आध घण्टा सुबह तथा शाम सूर्या नमस्कार, प्राणायाम, उत्थान आसन, कपाल भाती, धनुर आसन तथा सांसो की क्रिया के माध्यम से आप अपने यौवन, सौन्दर्य तथा प्राकृतिक आकर्षण को जीवन पर्यन्त बनाऐ रख सकते है।


प्रणायाम से बालों की प्राकृतिक रूप से वृद्वि होती है तथा बालों का सफेद होना तथा झड़ने जैसी समस्या को रोकने में भी मदद मिलती है। योगा का मानसिक शारीरिक, भावनात्मक तथा मनोभाव पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे आत्म विश्वास बढ़ता है।


उत्थान आसन के लगातार उपयोग से आप कील, मुंहासे, काले धब्बों आदि की समस्याओं का स्थाई उपचार पा सकते है। कपालभाति शासीर में कार्बन डाईक्साईड को हटाकर खून को साफ करने में मदद मिलती है। उससे शरीर में हल्कापन महसूस होता है। धनुर आसन से शरीर में रक्त का प्रभाव बढ़ता है तथा शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है इससे शरीर की त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है तथा त्वचा की रंगत में निखार भी आता है।

योगासन से रीढ़ की हड्डी तथा जोड़ों को लचकदार बनाया रखा जा सकता है। जिससे शरीर लम्बे समय तक लचीला तथा आकर्षक बनता है, योग से शरीर के भार को कम करने में भी मदद मिलती है तथा इससे मांस पेशियां नरम तथा मुलायम हो जाती है। सूर्यानमस्कार से शरीर पर बढ़ती आयु के प्रभाव को रोका जा सकता है तथा यह चेहरे तथा शरीर पर बुढ़ापे की भाव मुद्राओं के प्रभाव को रोकने में मददगार साबित होता है।


चेहरे की झुर्रियों से मुक्ति पाने के लिए सूर्यानमस्कार तथा प्राणायाम दोनों प्रभावी आसन है। अच्छा स्वास्थ्य तथा सौंदर्य एक ही सिक्के के दो पहलू है। यदि आप आन्तरिक रूप से सुन्दर नहीं है तब तक आपका सौंदर्य चेहरे पर नहीं झलक सकता। सुन्दर त्वचा, चमकीले बाल तथा छरहरे बदन के लिऐ अच्छी सेहत का होना परम आवश्यक है। वास्तव में मैंने समग्र स्वास्थ्य के लिए आर्युवैदिक सिद्धान्त को प्रोत्साहित किया।


योग से मानसिक तथा शारीरिक दोनों को प्रचुर लाभ मिलता है। इससे न केवल सभी मांस पेशियों को फायदा होता है बल्कि इससे प्राण शक्ति बढ़ती है तथा आन्तरिक अंगों की रंगत में निखार आता है।


योग प्राचीन भारतीय विद्या है तथा इसके निरन्तर अभ्यास से संयमित व्यक्तित्व तथा वृद्वावस्था की भाव मुद्राओं को रोकने में मदद मिलती है। इससे सांसों पर नियन्त्रण रहता है तथा योगाभ्यास के दौरान सांस खींचने तथा सांस बाहर निकलाने की उचित विधि से शवास को संयमित करने में मदद मिलती है । योग से सौंदर्य में व्यापक निखार आता है तथा यह त्वचा को ताजा तथा बीमारियों से पूरी तरह मुक्त रखती है। यह अवधारणा बालों पर भी लागू होती है। योग से सिर की खाल तथा बालों के कोश में रक्त संचार तथा आक्सीजन का व्यापक निरन्तर प्रवाह होता है। इससे बालों के रक्त संचार को पोष्टिक तत्व पहुंचाने में काफी मदद मिलती है जिससे बालो की वृद्धि तथा सिर की खाल को स्वास्थ्य रखने में बहुत मदद मिलती है।


वास्तव में योग नियमित रूप से तनाव से मुक्ति प्रदान करता है। जिससे त्वचा पर रंगत वापिस आ जाती है। योग करने से आप तत्काल पुनः यौवन प्राप्त करके चित प्रसन्न महसूस कर सकते है।


वास्तव में योग से बाहरी शारीरिक सौंदर्य को निखारने तथा संवारने में काफी मदद मिलती है।शरीर को स्वस्थ्य बनाने में तन और मन का बेहतर योगदान होता है। आमतौर पर देखा गया है कि हमारी शारीरिक बीमारियों के मानसिक आधार होते हैं। क्रोध हमारे मन को विकृत करता है जिससे हम विभिन्न प्रकार की बीमारियों से घिर जाते हैं फिर भी क्रोध से बिल्कुल अनभिज्ञ रहते हैं। योगाभ्यास क्रोध पर नियंत्रण रखने में अहम भूमिका निभाता है।



Monday, June 1, 2020

In A First, Kerala Schools’ New Academic Year Begins Online

With authorities trying their level best to bring back normalcy to day-to-day lives of people — thrown haywire by the coronavirus outbreak and subsequent lockdown — Kerala has opted for online teaching to ensure the studies of schoolchildren in the coastal state does not suffer.



Online classes have been enabled through state-owned KITE-Victers Channel to benefit about 4.5 million students from Class 1 to 12 of state syllabus schools.


Chief Minister Pinarayi Vijayan appeared on TV at 8.30 am on Monday and announced the commencement of the online classes.


“Each class will have separate time slots and schoolteachers concerned will have to constantly interact with their students to ensure that all follow the new routine of online classes,” said Vijayan.


For students who miss online classes due to power failure or connectivity issues, there will be a daily repeat telecast, as also available on YouTube.


But for the COVID scare, Monday would have witnessed the usual hustle and bustle in Kerala schools as students would have walked in wearing new school uniforms and carrying schoolbags.


Vice-Chairman and Executive Director Anwar Sadath of Kerala Infrastructure and Technology for Education (KITE) — which is behind the IT-enabled education in over 16,000 Kerala schools — told IANS that they have been working on the project for a while, with the biggest advantage that all digital content was ready.


He said it could never ever be imagined that online classrooms would be put into effect so quickly.


“We have prepared time-tables for all classes. The first class of the day was for Class 12 English subject for half an hour in which lectures recorded by two teachers were aired. This service reaches every student’s home through the KITE-Victers channel, which is aired by a cable TV network,” said Sadath.


Daily, there will be four periods for Class 12, 3 for Class X and two each for Class 8 and 9, and one period each for all other classes. Each period will be of 30-minute duration.


“KITE-Victers is holding online classes through the broadcast, web, and even offline. One or two teachers handle one subject for a 30-minute period. The telecast is watched by all the students of that particular class across the state. At the end of the day, the teachers concerned at every school interact with their students through mobile phones for feedback. It’s the responsibility of the teacher concerned to clear all doubts of his or her students,” said Sadath.


Recording of all lectures for the next two weeks has been done while recording for the third week has commenced.


Special arrangements have been made for students who do not have TVs or smartphones.


“In-state schools, there are 1.20 lakh laptops, 80,000 projectors, and 4,500 TV sets. By now, teachers have identified students who do not have access to TVs. We have made arrangements to set up TV facilities in which 5 to 10 students can visit near their homes and attend online classes while observing social distancing norms. All these students need to come for just 30 minutes daily,” the KITE officer said.


State Higher Education Minister (Colleges) K.T. Jaleel, who has been a history teacher, inaugurated the online classes for colleges by taking a lecturer on ‘renaissance’ for History students. For the colleges, it’s more of a web telecast.


State Education Minister C. Raveendranth, a former college professor, said that the online classes were just a temporary arrangement and not an alternative to traditional classroom learning.


“Once the situation normalizes, students can return to their classrooms. All shortcomings in the online system will be rectified,” said Raveendranath.


A Class 12 student, who attended her first online class, said it was a new experience for her.


“However, I wish to attend school and sit in a classroom with my friends. Online teaching does not give the same experience as one gets when in school. I wish and hope the schools reopen soon,” said the student.


Former Chief Minister Oommen Chandy pointed out that Victer's TV channel was launched by then-President APJ Abdul Kalam when Chandy was the Chief Minister in 2005.

  


Monday, May 25, 2020

कोरोना का प्रकोप, सादगी से मनेगी ईद

कोरोना महामारी को देखते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने श्नो शॉपिग फॉर ईदश् का अभियान चला रखा है। लिहाजा इस बार की ईद लॉकडाउन 4.0 में मनाई जाएगी। इस दौरान किसी को ईदगाह या मस्जिद में जमा होने की इजाजत नहीं होगी। इस बार ईद सादगी से मनेगी। लोग नए कपड़े नहीं पहनेंगे। मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा कहा जा रहा है कि जब मस्जिदों में नमाज बंद है, तरावीह बंद है, मस्जिदें वीरान हैं तो इस बार ईद का भी सेलिब्रेशन नहीं होना चाहिए। हम नए कपड़े, जूता, चप्पल, ज्वैलरी क्यों खरीदें। लॉकडाउन में घर पर ही रहें। बाहर निकलने से कोरोना के फैलने का भय भी है। मुश्किल हालात में ईद की शॉपिग करना गलत है।



ईद-उल-फितर भूख-प्यास सहन करके एक महीने तक सिर्फ खुदा को याद करने वाले रोजेदारों को अल्लाह का इनाम है। सेवइयां में लिपटी मोहब्बत की मिठास इस त्योहार की खूबी है। मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व न सिर्फ हमारे समाज को जोड़ने का मजबूत सूत्र है, बल्कि यह इस्लाम के प्रेम और सौहार्दभरे संदेश को भी पुरअसर ढंग से फैलाता है।


मीठी ईद भी कहा जाने वाला यह पर्व खासतौर पर भारतीय समाज के ताने-बाने और उसकी भाईचारे की सदियों पुरानी परंपरा का वाहक है। इस दिन विभिन्न धर्मों के लोग गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे से गले मिलते हैं और सेवइयां अमूमन उनकी तल्खी की कड़वाहट को मिठास में बदल देती है।


ईद-उल-फितर एक रूहानी महीने में कड़ी आजमाइश के बाद रोजेदार को अल्लाह की तरफ से मिलने वाला रूहानी इनाम है। ईद समाजी तालमेल और मोहब्बत का मजबूत धागा है, यह त्योहार इस्लाम धर्म की परंपराओं का आईना है। एक रोजेदार के लिए इसकी अहमियत का अंदाजा अल्लाह के प्रति उसकी कृतज्ञता से लगाया जा सकता है। दुनिया में चांद देखकर रोजा रहने और चांद देखकर ईद मनाने की पुरानी परंपरा है और आज के हाईटेक युग में तमाम बहस-मुबाहिसे के बावजूद यह रिवाज कायम है। व्यापक रूप से देखा जाए तो रमजान और उसके बाद ईद व्यक्ति को एक इंसान के रूप में सामाजिक जिम्मेदारियों को अनिवार्य रूप से निभाने का दायित्व भी सौंपती है।



रमजान में हर सक्षम मुसलमान को अपनी कुल संपत्ति के ढाई प्रतिशत हिस्से के बराबर की रकम निकालकर उसे गरीबों में बांटना होता है। इससे समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी का निर्वहन तो होता ही है, साथ ही गरीब रोजेदार भी अल्लाह के इनामरूपी त्योहार को मना पाते हैं। व्यापक रूप से देखें तो ईद की वजह से समाज के लगभग हर वर्ग को किसी न किसी तरह से फायदा होता है। चाहे वह वित्तीय लाभ हो या फिर सामाजिक फायदा हो।



भारत में ईद का त्योहार यहां की गंगा-जमुनी तहजीब के साथ मिलकर उसे और जवां और खुशनुमा बनाता है। हर धर्म और वर्ग के लोग इस दिन को तहेदिल से मनाते हैं। ईद के दिन सिवइयों या शीर-खुरमे से मुंह मीठा करने के बाद छोटे-बड़े, अपने-पराए, दोस्त-दुश्मन गले मिलते हैं तो चारों तरफ मोहब्बत ही मोहब्बत नजर आती है। एक पवित्र खुशी से दमकते सभी चेहरे इंसानियत का पैगाम माहौल में फैला देते हैं। अल्लाह से दुआएं मांगते व रमजान के रोजे और इबादत की हिम्मत के लिए खुदा का शुक्र अदा करते हाथ हर तरफ दिखाई पड़ते हैं और यह उत्साह बयान करता है कि लो ईद आ गई।


कुरआन के अनुसार पैगंबरे इस्लाम ने कहा है कि जब अहले ईमान रमजान के पवित्र महीने के एहतेरामों से फारिग हो जाते हैं और रोजों-नमाजों तथा उसके तमाम कामों को पूरा कर लेते हैं तो अल्लाह एक दिन अपने उक्त इबादत करने वाले बंदों को बख्शीश व इनाम से नवाजता है। इसलिए इस दिन को श्ईदश् कहते हैं और इसी बख्शीश व इनाम के दिन को ईद-उल-फितर का नाम देते हैं।


रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। इस पूरे माह में रोजे रखे जाते हैं। इस महीने के खत्म होते ही 10वां माह शव्वाल शुरू होता है। इस माह की पहली चांद रात ईद की चांद रात होती है। इस रात का इंतजार वर्षभर खास वजह से होता है, क्योंकि इस रात को दिखने वाले चांद से ही इस्लाम के बड़े त्योहार ईद-उल-फितर का ऐलान होता है। इस तरह से यह चांद ईद का पैगाम लेकर आता है। इस चांद रात को श्अल्फाश् कहा जाता है। जमाना चाहे जितना बदल जाए, लेकिन ईद जैसा त्योहार हम सभी को अपनी जड़ों की तरफ वापस खींच लाता है और यह अहसास कराता है कि पूरी मानव जाति एक है और इंसानियत ही उसका मजहब है।






Thursday, May 14, 2020

15 Measures to Revive Economy, Big Takeaways For MSMEs, NBFCs



Union Finance Minister Nirmala Sitharaman has come out with 15 new and some enhanced measures to revive businesses, and support workers via fiscal incentives and regulatory easing under the mega stimulus package — Self-Reliant India Movement — which was announced by Prime Minister Narendra Modi on Tuesday evening.


Accordingly, on Wednesday, Sitharaman announced the slew of fiscal and regulatory measures for MSMEs, real estate, NBFCs, power distribution and general businesses and workers.


She attempted to decrease the regulatory burden on companies while increasing the take-home pay of employees via these measures.


In terms of takeaways, the biggest was for the MSME sector which is considered to be the backbone of economic activity.


As a major reform measure for the sector, the Centre has decided to give a new definition to MSMEs.


This will denote the type of companies that will be included in the sector. Specifications wise, the investment limit for defining MSMEs has been revised upwards.


Besides, she highlighted that additional criteria such as turnover have been considered for defining MSMEs.


In terms of fiscal measures, the Minister announced that Rs 3 lakh crore “Collateral-free Automatic Loans” for businesses, including MSMEs, will be provided to meet operational liabilities built up, buy raw material and restart the business.


She announced another scheme worth Rs 20,000 crore for “Subordinate Debt for Stressed MSMEs”.


A Rs 50,000 crore “Fund of Funds” for MEMEs which face a severe shortage of equity was also announced.


The Centre has also decided not to go in for global bidding for government procurement for tenders up to Rs 200 crore, thereby, promoting the participation of MSMEs, she said.


Furthermore, e-market linkage for MSMEs will be provided and that the CPSEs will pay all receivables to MSMEs within 45 days.


Besides MSMEs, a Rs 30,000 crore special liquidity scheme for non-banking finance companies (NBFCs), housing finance companies (HFCs) and micro-finance institutions (MFIs) was announced.


This scheme will provide investments in both primary and secondary market transactions in “investment grade debt paper of these institutions”.


The minister said the scheme will support the previous initiatives of the government and the central bank to boost liquidity.


The securities under the scheme will be fully guaranteed by the Central government. Further, the FM has also announced Rs 45,000 crore partial credit guarantee scheme for NBFCs.


Under this measure, the first 20 per cent loss will be borne by the Centre, and even unrated papers will be eligible for investment, enabling NBFCs to reach out even to MSMEs in far-flung areas.


Additionally, a Rs 90,000 crore liquidity injection plan was announced for the financially stressed power distribution companies.


This plan will allow these entities to clear their dues towards power generation companies.


As per the plan, the liquidity window for discoms was essential as its revenue has plummeted and they are in the midst of unprecedented cash flow problem accentuated by demand reduction during the current lockdown.


The scheme will allow power sector financiers — PFC and REC to infuse liquidity of Rs 90,000 crore to discoms against receivables.


Loans will be extended against State guarantees for the exclusive purpose of discharging liabilities of discoms to gencos.


Apart from discoms, relief steps for the real estate industry were also announced.


The Minister stated that Union Ministry for Housing and Urban Affairs will issue advisory to states and union territories to declare the Covid-19 situation as a ‘force majeure’ under the Real Estate (Regulation and Development) Act.


With this move, the government has allowed the suo-moto extension of the registration and completion date by six months for all registered project expiring on or after March 25, 2020, without individual applications.


Simultaneously, to give regulatory relief to businesses Sitharaman announced a six-month extension of contracts for contractors by all central agencies and departments including railways, the Central Public Works Department, and Ministry of Road Transport & Highways.


The extension would not come with any cost for the contractors, she said. This scheme covers construction works and goods and services contracts.


It also applies on obligations like completion of work, intermediate milestones and extension of concession period in public-private partnership contracts.


The minister also announced that government agencies will partially release bank guarantees, to the extent contracts are partially completed, to ease cash flows.


Finally to provide more money into the taxpayers’ hands, Centre decided to reduce the TDS (tax deduction at source) rates for non-salaried specified payments made to residents, and the TCS (tax collection at source) rates by 25 per cent for the specified receipts.


Sitharaman said the move would release Rs 50,000 crore liquidity.


As per the announcement, the reduced TDS rate will be applicable to the payment for a contract, professional fees, interest, rent, dividend, commission and brokerage. It will be applicable for the remaining part of FY21 — from May 14 to March 31, 2021.


Speaking to the media, Finance Minister pointed out the due date of all income tax returns for FY 2019-20 will be extended from July 31, 2020, October 31, 2020, to November 30, 2020, and tax audit from September 30, 2020, to October 31, 2020.


The government has also extended the date of assessments getting barred on September 30, 2020, to December 31, 2020, and those getting barred on March 31, 2021, to September 30, 2021.


In another major move for businesses and charitable trusts, Sitharaman announced that all pending refunds to charitable trusts and non-corporate businesses and professions, including proprietorship, partnership, LLP and co-operatives, shall be issued immediately.


In addition, she announced a further extension of the deadline for settling tax disputes under the Vivid se Vishwaas scheme without paying any interest and penalty to December 31, 2020, from June 30, 2020.


“The sectors covered in the initial phase are clearly the ones that required the highest policy attention at this juncture, including MSME, power, and construction and real estate. The impact of the package totalling Rs 20 lakh crore to be unveiled in the next few days would add to spending power and bring relief to millions of enterprises that employ huge numbers of workers. We expect the stimulus measure to impart stability and growth to the economy,” said Vikram Kirloskar, President, Confederation of Indian Industry.


According to Ficci’s President Sangita Reddy: “The greatest takeaway from today’s announcement was the clear focus on getting liquidity flowing into the system.”


“Besides liquidity, we need to give equal focus on generating consumption demand and propping up investments. We hope that in the next set of announcements, these areas will be taken up in a comprehensive manner as well.”


On its part, Assocham’s Secretary General Deepak Sood said: “The Rs 3 lakh crore collateral-free loans for the MSMEs on a guarantee from the government would have a big-time multiplier impact and would generate economic activity of at least up to Rs 10 lakh crore, not only retaining the jobs but also creating additional employment.”


He further said, treating COVID-19 as an ‘act of God’ and allowing the real estate developers extra six months for completion of projects would help both the developers and the consumers as it would make the sector viable.


Sood listed reduction in the TDS by 25 percentage points as a demand-boosting measure along with a cut in the EPFO deductions from 12 to 10 per cent.


Industry body PHD Chamber’s President D.K. Aggarwal said the liquidity injection of Rs 90,000 crore for DISCOMs will significantly help the power sector in mitigating the impact of demand deduction amid pandemic COVID-19 scenario.




Thursday, May 7, 2020

बुद्ध पूर्णिमा : भगवान बुद्ध का संदेश सत्य, अहिंसा और करुणा का अमूल्य उपहार हैं

भगवान बुद्ध का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा को हुआ था इस पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। भगवान बुद्ध का सत्य, अहिंसा और करुणा का संदेश मानवता की अमूल्य निधि हैं, उनकी शिक्षा धर्माचरण, नैतिक मूल्यों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने तथा अपनी प्रेरणा और प्रकाश स्वयं बनने को प्रेरित करती है।

बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध अनुयायियों के साथ-साथ हिंदुओं के लिये भी खास पर्व है। हिन्‍दू धर्म में गौतम बुद्ध को भगवान श्री विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार बुद्ध के जीवनकाल को 563-483 ई.पू. के मध्य माना गया है। अधिकांश लोग नेपाल के लुम्बिनी नामक स्थान को बुद्ध का जन्म स्थान मानते हैं. गौतम बुद्ध की मृत्यु, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में 80 वर्ष की आयु में हुई थी।


वैसाख पूर्णिमा के दिन सुबह-सुबह श्री हरि विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन धर्मराज की पूजा करने की भी मान्यता है। कहते हैं कि सत्यविनायक व्रत से धर्मराज खुश होते हैं। माना जाता है कि धर्मराज मृत्यु के देवता हैं इसलिए उनके प्रसन्न होने से अकाल मौत का डर कम हो जाता है।


बुद्ध पूर्णिमा का संबंध बुद्ध के साथ केवल जन्म भर का नहीं है बल्कि इसी पूर्णिमा तिथि को वर्षों वन में भटकने व कठोर तपस्या करने के पश्चात बोधगया में बोधिवृक्ष नीचे बुद्ध को सत्य का ज्ञान हुआ। कह सकते हैं उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति भी वैशाख पूर्णिमा को हुई। इसके पश्चात महात्मा बुद्ध ने अपने ज्ञान के प्रकाश से पूरी दुनिया में एक नई रोशनी पैदा की और वैशाख पूर्णिमा के दिन ही कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ। कुल मिलाकर जन्म, सत्य का ज्ञान और महापरिनिर्वाण के लिये भगवान गौतम बुद्ध को एक ही दिन यानी वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुआ।


भारत के साथ साथ चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया, पाकिस्तान जैसे दुनिया के कई देशों में बुद्ध पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती मनाई जाती है। भारत के बिहार राज्य में स्थित बोद्ध गया बुद्ध के अनुयायियों सहित हिंदुओं के लिये भी पवित्र धार्मिक स्थल है। कुशीनगर में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लगभग एक माह तक मेला लगता है। हालांकि लॉकडाउन की वजह से इस साल मेले का आयोजन नहीं किया गया है। श्रीलंका जैसे कुछ देशों में इस उस्तव को वेसाक उत्सव के रूप में मनाते हैं। बौद्ध अनुयायी इस दिन अपने घरों में दिये जलाते हैं और फूलों से घर सजाते हैं। इस दिन बौद्ध धर्म ग्रंथों का पाठ किया जाता है।


भगवान बुद्ध केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिये आराध्य नहीं है बल्कि उत्तरी भारत में गौतम बुद्ध को हिंदुओं में भगवान श्री विष्णु का नौवां अवतार भी माना जाता है। विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री कृष्ण माने जाते हैं। हालांकि दक्षिण भारत में बुद्ध को विष्णु का अवतार नहीं माना जाता है। दक्षिण भारतीय बलराम को विष्णु का आठवां अवतार तो श्री कृष्ण को 9वां अवतार मानते हैं। बौद्ध धर्म के अनुयायी भी भगवान बुद्ध के विष्णु के अवतार होने को नहीं मानते।




Friday, May 1, 2020

कोरोना संक्रमण के दौर में पेट के लिए जूझते मजदूर



  • मजदूर दिवस 01 मई पर विशेष

मजदूर और उनके दर्द को समझ पाना हर किसी के वश की बात नहीं। कोरोना वायरस फैलने के बाद देश और दुनिया में मजदूरों के समक्ष भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। अपनी मेहनत के बूते अपनों का पेट भरने वाला मजदूर आज खुद ही अपना पेट पालने के लिए सरकार पर आश्रित है। इनके जीवन की नाव बीच मंझधार में फंस गई है।


भले ही इनके लिए इंतजाम करने के दावे किए जाते हों मगर उन दरों-दीवार की दहलीज के अंदर का पुरसाहाल किसे पता जहां एक रोटी में दिन गुजारने पड़ रहे हैं। मां का कलेजा उस वक्त दर्द से फट जाता है जब उसके मासूम को दूध तक नसीब नहीं हो पाता है। पर, करे भी तो क्या उसकी तकदीर में शायद यही लिखा है, इसे अपना नसीब मानकर जिंदगी के बचे दिन खुद और अपने परिवार वालों को जिंदा रखने की जद्दोजहद में काट रहे हैं।


 "गए थे अपने परिवार के गुजर-बसर के लिए परदेस कमाने मगर उन्हें क्या पता था कि चीन की गलती का खामियाजा उन्हें अपने देश में भुखमरी के रूप में भुगतना पड़ेगा। मगर ऐसा ही हुआ, सबकुछ बदल गया, देशवासियों को बचाने के लिए सरकार ने फैसला लिया लॉकडाउन का और देश का नजारा बदल गया"


बंद हो गई फैक्ट्रियां, बंद हो गई दुकानें, बंद हो गई मजदूरी, फिर क्या दो-चार दिन तो किसी तरह कट गए मगर उसके बाद रोज कमाने खाने वालों के सामने बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई। परदेस में अपने घर की तरफ जाने का कोई साधन नहीं मिला तो पैदल ही हजार किमी चल पड़े। कई राहों में जिंदगी को आखिरी सलाम कर गए तो बहुत बड़े पैमाने पर लोग अपने घऱों तक सही सलामत पैदल ही पहुंच गए।कल तक इन मजदूरों की कोई कीमत नहीं थी। लेकिन आज जब खेतों में अनाज सड़ने लगे, दुनिया का बोझ उठाने की जरूरत पड़ी तो इनकी अहमियत सभी को समझ आने लगी।


जो पैसे के लिए हाय-हाय किए रहते थे, वो आज खुद को भी हाशिए पर पा रहे हैं। कहते हैं कि जिंदगी रहेगी तभी तो यह पैसा काम आएगा। काश! वक्त रहते इसको समझ पाते लोग लेकिन इसको कहां तक लोग समझ पाएंगे, कब समझ पाएंगे यह तो लॉकडाउन खत्म होने के बाद जिंदगी के सलामती के बाद ही पता चल पाएगा।


भारतीय शहरों में हमेशा से बाहरी मजदूर रहे हैं। मजदूर शहरों की कई जरूरतों को पूरा करने के लिए रहते हैं। मजदूर कितनी बुरी परिस्थितियों में प्रमुख शहरों में रहते हैं इसका हाल सभी जानते हैं मगर कोई इनके दर्द को समझने की कोशिश नहीं करता। इनके उत्थान के लिए सरकारें वादा तो करती हैं मगर इन तक कितनी सुविधाएं पहुंचती हैं ये किसी से छुपी नहीं है।


1 मई, 1886 को मजदूरों के सम्मान में एक दिन की छुट्टी का ऐलान हुआ, जिसे अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसको अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, श्रम दिवस या मई दिवस भी कहते हैं। इस दिवस को मनाने के पीछे उन मजदूर यूनियनों की हड़ताल है जो कि आठ घंटे से ज्यादा काम न कराने के लिए की गई थी। मजदूर हमारे समाज का वह हिस्सा है जिसपर समस्त आर्थिक उन्नति टिकी है। वर्तमान समय के मशीनी युग में भी उनकी महत्ता कम नहीं हुई है।


श्रम बेचकर मजदूर अपनी न्यूनतम मजदूरी कमाता है। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ को बढ़ावा देने के लिये मजदूर दिवस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने लगा। पारंपरिक तौर पर इसको यूरोप में गर्मी के अवकाश के रूप में घोषित किया गया था, इसीलिए पूरे विश्व में 1 मई को “अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस” मनाया जाता है। वैसे तो इस मौके पर दुनिया के 80 देशों में राष्ट्रीय अवकाश रहता है। इस दिवस का मूल उद्देश्य “सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए श्रमिकों को एकजुट करना” है।


"आठ घंटे के कार्यदिवस की जरूरत को बढ़ावा देने के अलावा मजदूरों और मालिकों के बीच संघर्ष को खत्म करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया जाता है। पहले मजदूरों के काम करने की स्थिति बहुत कष्टदायक और असुरक्षित थी। 10 से 16 घंटों तक काम करना पड़ता था। अमेरिकन संघ के द्वारा 1884 में श़िकागो के राष्ट्रीय सम्मेलन में मजदूरों के लिये काम के लिए वैधानिक समय के रूप में आठ घंटे निर्धारित किया गया।"

 
हालांकि भारत में 1 मई 1923 को श्रमिकों द्वारा “मद्रास दिवस” मनाया गया था। किसान मज़दूर पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने इसकी शुरुआत की थी और मद्रास हाईकोर्ट के सामने इस दिन को पूरे भारत में “मजदूर दिवस” के रूप में मनाने का संकल्प लिया और छुट्टी का ऐलान किया था।



कोरोना संक्रमण से जंग जीतने के बाद लॉकडाउन खुलेगा। उसके बाद की दुनिया बदलेगी, लोगों का जीवन फिर से पटरी पर लौटेगा। इस विषम परिस्थिति में सभी अपने तरीके से दर्द बांटने की कोशिश कर रहे हैं। मगर सोचने और विचारने का विषय यह है कि क्या इस भयावह दौर के गुजर जाने के बाद मजदूरों की जिंदगी बदलेगी? क्या इनकी उम्मीदों पर दुनिया खरी उतरेगी? या फिर इनके जीवन में मजदूरी का वही दर्द पिरोया मिलेगा। यह तो वक्त गुजरने के साथ खुद ही पता चल जाएगा।


 


Wednesday, April 29, 2020

झारखंड में संत अन्ना धर्मसंघ की पुत्रियां निरन्तर कर रही है मानव सेवा

संत अन्ना धर्मसंघ की पुत्रियों के तत्वधान में झारखण्ड के सुदूर ग्रामीण और कुछ शहरी क्षेत्रों में जरूरतमंद और निःसहाय परिवारों के बीच अपने अनुयायियों एवं समर्थकों के साथ खाद्य पदार्थ एवं सुरक्षा सामग्री का निरन्तर लाॅकडाउन के बाद से ही वितरण हो रहा है।




झारखंड राज्य में जो अपनी सेवाएं लंगर एवं राशन बांटने में संत अन्ना धर्मसंघ निःस्वार्थ भाव से राज्य में प्रभावित हजारों परिवारों के बीच कर रहा है, यह सेवा झारखंड में चलाये जा रहे सरकारी विभागों द्वारा और अन्य समाजिक संस्थाओं द्वारा की कड़ी में एक महत्वपूर्ण योगदान है। इसकी चर्चा झारखंड के जनमानस में बहुत सम्मानित ढंग से हो रही है।


       "संत अन्ना धर्मसंघ की पुत्रियां झारखण्ड राज्य के अलावे मध्यप्रदेश, बंगाल, असम जहां कुछ क्षेत्रों में     उनकी शाखाएं हैं, वहां भी उनके अनुयायी निःस्वार्थ भाव से मानव सेवा में तन-मन-धन से समर्पित हैं।"


लाभुकों जिनकी आर्थिक दृष्टि दयनीय है, ससम्मान एवं प्यार से उन्हें कच्चा राशन घर-घर पहुंचाकर दिया जा रहा है।

कुछ तस्वीरों में संत अन्ना धर्मसंघ द्वारा की जा रही सेवाएं झलकती हैं। इन सेवाओं में महामान्वर फेलिक्स टोप्पो, एस0जे0, महाधर्माध्यक्ष, राॅंची, अति मान्यवर थेओदोर मस्करेन्हस, एस0 एफ0 एक्स., सहायक धर्माध्यक्ष, राॅंची, डाॅ0 स्टीफन हांसदा, मेडिकल सुपीरिटेन्डेन्ट, फा0 मक्सीमुस टोप्पो, पल्ली पुरोहित, सम्मानीया सि0 लिण्डा मेरी वाॅन, सुपीरियर जेनेरल, डी0 एस0 ए0 व महासलाहकारिणियाँ क्रमशः सि0 लिली ग्रेस टोपनो, सि0 निर्मला ज्योति कच्छप, व सि0 मेरी पुष्पा तिर्की, सि0 सोशन बाड़ा, सि0 जसीन्ता, अपने सहयोगियों के साथ तन-मन से निरन्तर कार्यरत हैं और मानव एकता की मशाल जला रहे हैं।


इस संकट की घड़ी में संत सन्ना धर्मसंघ की पुत्रियों ने शहरी एवं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में उन स्थानों का चयन किया है, जहां बहुत हीं असहाय एवं जरूरतमंद परिवार रहते हैं और जिन्हें राशन और भोजन की नितांत आवश्यकता है, जैसे दिस्किली, बलीकत, बारटोली, कडरूटोली, कच्चाबाड़ी, माण्डर के सुदूर गांव, सिदरौल, बूढ़मू, लोहरा कोचा, बिरसा चैक, लोवाडीह इत्यादि अनेक छोटे-बड़े कस्बे और गांव शामिल हैं।


सेवारत पुत्रियों ने साथ ही साथ राहत सामग्री बांटते हुए सभी लोगों को कोरोना वायरस से संबंधित सावधानी व बचाव की कई जानकारियाॅं दी और भोजन वितरण स्थल पर आनेवाले लोगों को मास्क लगाकर आने के लिए हिदायत दी तथा सावधानी के अन्तर्गत उन्होंने बताया कि आपसब एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाकर रहिए, इसमें कोरोना वायरस से मुक्ति होगी।


"संत अन्ना धर्मसंघ की पुत्रियों का कहना है कि इस संसार में रहने वाले बहन-भाई सब अपने हैं और उनकी सेवा करना हमारा कर्तव्य है।"