Tuesday, August 27, 2019

Cabinet may relax FDI in retail, okay ordinance to roll back FPI surcharge

The Union Cabinet in its meeting on Wednesday would take up proposals to relax foreign direct investment (FDI) in various sectors, including single-brand retail and digital media, as announced by Finance Minister Nirmala Sitharaman in her maiden Budget last month.



The liberal FDI regime is expected to attract foreign players to invest in the country which is facing a slowdown.

Seeking to make India more attractive FDI destination globally, Sitharaman had said that government would examine suggestions of further opening up of FDI in aviation, media (animation) and insurance sectors in consultation with all stakeholders.

The cabinet chaired by Prime Minister Narendra Modi may also consider approving an ordinance to roll back surcharge on foreign portfolio investors (FPIs). Sources said it had been decided to take ordinance route to scrap the higher surcharge.

In a sort of mini-Budget which included a flurry of measures to boost the economy, Finance Minister had last Friday announced rolling back the enhanced surcharge from long-term and short-term capital gains on FPIs thus returning to pre-Budget status.

The Budget proposal subsequently approved by Parliament raised surcharges on super-rich having annual taxable income more than Rs 2 crore. The surcharge of 25 percent was levied on those having taxable income between Rs 2 crore and 5 crores, and 39 percent on those with taxable income over Rs 5 crore.

While raising the levy, the government included all the individuals and association of persons (AOPs) under the purview of the enhanced surcharge. Since many foreign portfolio investors (FPIs) are structured as an association of persons (AOPs), limited liability partnerships and trusts, the higher surcharge applied to them.

Hit by the additional tax burden, the FPIs started pulling out money from the markets creating a negative sentiment. With massive capital outflow triggered by the levy, the government came under pressure and held a meeting with FPIs and domestic institutional investors to understand their concerns. Following the consultation, it decided to scrap the tax move.

Markets have responded positively to the surcharge roll-back with both BSE Sensex and NSE Nifty 50 indexes surging more than 2% on Monday, the first working day after the much-awaited announcement.

Source: Trusted Online News Portals in India

Wednesday, August 7, 2019

सुषमा स्वराज के निधन से स्तब्ध और दुखी हूं : रघुवर दास

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज कहा कि पूर्व विदेश मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज जी के निधन से वह स्तब्ध और दुखी हैं।
श्री दास ने यहां अपने शोक संदेश में कहा, “सुषमा जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित किया। उनकी कमी हमें सदैव महसूस होगी। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति दे।“
उल्लेखनीय है कि पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल्ली के अखिल भरतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अस्पताल में मंगलवार की रात को निधन हो गया। वह 67 वर्ष की थीं। उनके परिवार में पति स्वराज कौशल और एक पुत्री बांसुरी स्वराज हैं।
वह लंबे अरसे से बीमार चल रही थीं और उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था। श्रीमती स्वराज को कल रात करीब दस बजे हृदयाघात के बाद एम्स में लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर ले कर बचाने का प्रयास किया लेकिन उनके शरीर ने साथ नहीं दिया।

Friday, July 5, 2019

पूर्ण सत् गुरु ज्ञान देकर भव सागर से पार लगा देता है : चम्पा भाटिया

उतिष्ठित, जाग्रत, प्राप्य, वराणिबोधत्। उठो जागो और बोध प्राप्त करो।

इन शब्दों में मानव के लिए संदेश है कि हे मानव! इस आत्मा को जगाकर इसपर विचार करो कि तुम्हें यह मनुष्य जन्म जो मिला है, यह परमात्मा की प्राप्ति करके चैरासी लाख योनियों से मुक्त होने का अवसर है। ग्रंथों के अनुसार बढ़े भाग्य से मनुष्य जन्म मिलता है। इसमें केवल दुनियावी कामों में जीवन बिता दिया तो ये बाजी हारकर चले जाओगे।
जीवन का मूल उद्देश्य प्रभु की जानकारी करके इसका बोध हासिल करके आवागमन के चक्कर से मुक्त होना है। रामचरित मानस में लिखा हैः-
निद्रा, भोजन, भोग, भय से पशु पुरख समान। ज्ञान अधिक इक नरन् में ज्ञान बिना पशु जान।।
भाव, पशु और इंसान अपने आराम करने की सुरक्षित स्थान की व्यवस्था सूझ-बूझ से करते हैं। भोजन भी अपनी रूचि के अनुसार जानवर एवं इंसान सोच समझ कर करते हैं। हाथी जैसे मन भर खाता है पर केवल शाकाहार ही खाता है परन्तु शेर के आगे अच्छे से अच्छा पकवान अगर शकाहार है तो वह नहीं खाएगा। खाना चाहे पशु है या मानव बुद्धि से सोच समझ कर ही खाता है। कहीं कोई फर्क नहीं।
परिवार से भी मनुष्यों एवं पशुओं के वंश बढ़ते जाते हैं। आत्म रक्षा के प्रति जैसे मनुष्य सजग है, वैसे ही छोटे से छोटा जानवर भी अपने आपको बचाता है, उसे भी भय लगता है। ज्ञान (प्रभु परमात्मा की जानकारी) मनुष्य को पशुओं से अलग करता है, अन्यथा मनुष्य भी ज्ञान के बिना पशु के समान जीवन जी कर चला जाता है। श्री कृष्ण जी ने कहा हैः-
बहुनाम् जन्मनाम् अन्ते ज्ञानवान माम् प्रपद्यते। वासुदेवः सर्वम् इति स महात्मा सुदुर्लभः।। 9-11

बहुत से जन्मों के बाद ज्ञानवान मेरी शरण में आता है। वह महात्मा दुर्लभ होता है। उस ज्ञानवान के लिए वासुदेव (जो सब देवताओं में वास करता है और जिसमें सभी देवता वास करते हैं) ही सबकुछ हैं, भाव वह एक प्रभु को ही सबकुछ समझता है, उनके तुल्य किसी और की पूजा उपासना को महत्व नहीं देता। प्रभु परमात्मा का ज्ञान प्राप्त करने की विधि गीता के चैथे अध्याय के 34वें श्लोक में बताईः-

तत् विद्धि प्रणिपातेण् परिप्रश्नेन सेवया। उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानम् ज्ञानिनः तत्व दर्शिनः।।

परमात्मा का ज्ञान प्राप्त करने के लिए ज्ञानियों, तत्वदर्शियों (जिन्होंने परमात्मा के निराकार रूप के दर्शन किए हैं) के पास जाकर चरणों में नमस्कार करके, सेवा करके, विनय पूर्वक प्रश्न करो, वे ज्ञानीजन तुझे ज्ञान का उपदेश देंगे। अर्जुन ने भी प्रभु के निराकार रूप को देखने के लिए विनती की कि अगर आप मुझे निराकार रूप के दर्शन के योग्य समझते हैं तो कृपा करके मुझे अपने अविनाशी रूप के दर्शन दें।

मीरा जी को भी इसी युग में प्रभु के अविनाशी रूप के दर्शन मुझ रविदास के द्वारा हुए। हर युग में यह जानकारी सत्गुरु की शरण में आकर हुई है और किन्हीं भी साधनों से प्रभु को प्राप्त नहीं किया जा सकता। गुरु गीता के अनुसारः-

न जपः न तपः न पुण्य न तीर्थम् न यज्ञ न दानम् एव च  गुरुः तत्वम् अविज्ञाय सर्व व्यर्थम् भवेत प्रिये।
गुरु से तत्व रूप को जाने बिना जप तप यज्ञ दान पुण्य तीर्थ आदि सब व्यर्थ है। गीता में श्रीकृष्ण जी ने कहाः-
न अहम् वेदैः न तपसा न दानेन न च इज्जया।
शक्य एवम्-विद्यः द्रष्टुम दृष्टवान असि माम् यथा।। 11-53
मेरा यह निराकार रूप जिसने देखा है, उसी के द्वारा देखा जाना संभव है। न वेदों के पठन से, न दान से, न तप से और न यज्ञ आदि के द्वारा इसे जाना जा सकता है। केवल सत्गुरु ही प्रभु के अविनाशी रूप को प्रकट करके दिखा देता है। अवतार बाणी में विदित हैः-
न जप अंदर न तप अंदर न मिलया न मिलना ए।
बिन माझी सागर विच बेड़ा न ठिलया न ठिलना ए।।
ए मिलदा ए मिल सकदा ए मुर्शद दे इक इशारे नाल, कहे अवतार पूरा गुरु छिन विच कर देंदा ए मायाजाल
सत्गुरु ही ज्ञान उजाला (रोशनी) देकर माया और मायापति प्रभु परमात्मा को भिन्न करके बता सकता है। इंसान भौतिक पदार्थों की तरफ तो प्रयासरत रहता है, परन्तु प्रभु की प्राप्ति की तरफ सोया हुआ है। श्री कृष्ण जी ने गीता के एक श्लोक में इसके बारे में कहाः-

या निशा सर्वभूतानाम् तस्याम् जागर्ति संयमी।
यस्याम् जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः।। 2-69
ए मिलदा ए मिल सकदा ए मुर्शद दे इक इशारे नाल, कहे अवतार पूरा गुरु छिन विच कर देंदा ए मायाजाल
सत्गुरु ही ज्ञान उजाला (रोशनी) देकर माया और मायापति प्रभु परमात्मा को भिन्न करके बता सकता है। इंसान भौतिक पदार्थों की तरफ तो प्रयासरत रहता है, परन्तु प्रभु की प्राप्ति की तरफ सोया हुआ है। श्री कृष्ण जी ने गीता के एक श्लोक में इसके बारे में कहाः-

या निशा सर्वभूतानाम् तस्याम् जागर्ति संयमी।
यस्याम् जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः।। 2-69
भु परमात्मा को पाने की कामना करने वाला मनुष्य भौतिक वस्तुओं के प्रति उदासीन भाव रखता है। उसके हृदय में ईश्वर को पाने की तड़प होती है, वह उसी के प्रति जागरूक है, जागा हुआ है, यत्नशील है। ईश्वर को पाकर ही मनुष्य मानव योनि में चैरासी लाख योनियों के आवागमन के चक्कर से मुक्त हो सकता है। अवतार बाणी में भी इंसान को जगाने का प्रयास किया हैः-

मानुष जन्म आखरी पौड़ी तिलक गय ते वारी गई।
कहे अवतार चैरासी वाली घोल घमाई सारी गई।।
जिसके हृदय में प्रभु के दर्शन की प्यास है उसपर श्री गुरु नानक देव जी बलिहार जाते हैं।
जिस जन को प्रभ दरस प्यासा।
नानक ताके बल बल जासा।।
परमात्मा की प्राप्ति के उपाय धार्मिक ग्रंथों में बताए हैं।
पूरे गुर का सुन उपदेश पारब्रह्म निकट कर पेख।
पूर्ण सत्गुरु इसका ज्ञान देकर इस भव सागर से पार लगा देता है।

Friday, June 28, 2019

Latest Business News In India




Adding to the plethora of new features that Google has been introducing to Maps, the search-engine giant would now predict transit crowdedness of buses and trains for passengers.
The new feature has already been made available in around 200 cities around the globe, The Verge reported on Thursday.
The search-engine giant is basing these details on past rides and for months and has been asking some people who use Maps to provide additional details about the level of crowdedness of their transit trips.

Thursday, June 6, 2019

Google Search, Assistant get special World Cup features

Keeping in line with the the ICC Cricket World Cup 2019 action, Google on Wednesday introduced special features to its Search, Assistant to help people get all the important match updates.

Users can now explore the tournament table, stats and upcoming matches right by just typing “ICC Cricket World Cup” on Search in languages including English, Hindi, Bengali, Marathi and Urdu, the company said in a statement.

For people who would not be able to watch the match Live, Google would show short video clips of match highlights and allow people to read through live commentary in English and Hindi.

To keep track of all the matches, users would be allowed to pin real-time scores on their Android phone screens from Search on mobile browsers or from the Android Google App, said the company.

In addition, Google Assistant would also help users keep up with the World Cup action by answering questions like “Hey Google, when does India play next?”

You can even get up-to-date stats by asking, “Hey Google, what are the current Cricket standings?” This also works in Google Search.

Source:- Technology News : Insight Online News

Saturday, May 25, 2019

मन तू जोत सरूप हैं अपना मूल पछान : चम्पा भाटिया

जब तक वर्ण कुल सब है तब तक ज्ञान उदय नहीं होता।

ब्रह्म ज्ञान पाकर सब वर्ण वर्जित (समाप्त, गौण) हैं।



निरंकार ने मनुष्य को विवेक दिया, सोचने समझने की बुद्धि दी, इसे जिज्ञासा हुई कि मैं कौन हूँ ? किसका अंश हूॅं? इस कठिन प्रश्न का हल सत्गुरु द्वारा प्राप्त हुआ।
मन तू जोत सरूप है, अपना मूल पछान।
तू शरीर नहीं इस परमात्मा का रूप है, इसकी पहचान करनी है। निराकार इन चर्म चक्षुओं से दिखाई नहीं देता, सत्गुरु ने ज्ञान देकर इसके दर्शन कराए और समझा दिया कि इस प्रभु की भक्ति कैसे करनी है। हर ग्रंथ में भक्ति करने का यही एकमात्र मार्ग बताया है।
कामी क्रोधी लालची तिनसे भक्ति न होए।
भक्ति करे कोई सूरमा जात वर्ण कुल खोए।।
जाति वर्ण कुल ये सब साकार शरीर के साथ जुड़े हैं। लालच क्रोध कामनाएॅं इन सबका भाव समाप्त करके ही भक्ति हो सकती है। दूसरे प्रण में हुजूर माता जी ने बताया कि जाति वर्ण से ऊपर उठकर ही भक्ति का आनन्द प्राप्त कर सकेंगे।
पुरातन ग्रंथ शिव संहिता में 57वें श्लोक में भी यही लिखा हैः-
यावत् वर्णम् कुलम् सव्र्वम् तावत् ज्ञानम् न जायते।
ब्रह्मज्ञानम् पदम् ज्ञात्वा सव्र्व वर्ण विवर्जितः।।
इसमें स्पष्ट कर दिया कि हृदय में ज्ञान तभी बसता है जब जाति वर्ण का मान नहीं रहता। ज्ञान प्राप्त करके निरंकार से जुड़कर वह भी निरंकार ही हो जाता है। शिव संहिता के 30वें श्लोक में लिखा हैः-
निराकार मनो यस्य निराकार समो भवेत्।
जिस व्यक्ति का मन निराकार में है, वह निराकर के समान ही होता है।
तस्मात् सव्र्वप्रयत्नेन साकाराशु परित्यजेत्।
इसलिए सारे यत्नों से साकार (भाव) को त्याग देना चाहिए।
सत्गुरु ने दया करके इस विराट के दर्शन कराए तो जाना कि निरंकार के सिवाए और कुछ है ही नहीं। जो भी साकार रूप नजर आता है उसका अपना अस्तित्व कुछ है ही नहीं। निरंकार जब चाहे इस समाप्त कर दे। दिखाई देने वाली हर वस्तु ने मिट जाना है।
जिन्हें यह ज्ञान प्राप्त हो जाता है वे सब में निरंकार रूप ही जानकर चरणों में नमस्कार करते हैं। आदि शंकराचार्य जी ने 526 ई0 में जो दोहा लिखा था, वह भी एक दूसरे के चरण स्पर्श की ओर प्रेरित करता है।
आकाशात् पतति तोयम् यथा गच्छति सागरम्।
जैसे आकाश से पानी गिरता है और सागर की ओर जाता है। बादल कहीं भी बरसें। पहाड़ों, नदियों, नालों या भूमि पर पहॅुंचना उसे सागर में ही है। इसी प्रकार
सर्व देह नमस्कारः तथा केशवम् गच्छति।।
वैसे ही सब देह को नमस्कार केशव (परमात्मा) को पहुॅंचती है। कहीं नहीं लिखा कि आयु विशेष या किसी जाति विशेष को की गई नमस्कार ही पहुॅंच सकती है।
भाग्यशाली है हम हमें ऐसा सत्गुरु मिला है। जिनका एक-एक बोल मंत्र है। इन्होंने उजाला देकर जो हमारी सोच बदल दी, हमें जीने की राह सिखाई रामचरित मानस में लिखा हैः-
उमा जे राम चरण रत विगत काम मद् क्रोध।
देखहिं प्रभुमय जगत कहिंसन करहिं विरोध।।
हे पार्वती। जो प्रभु राम के चरणों से जुड़ जाते है, उनका काम क्रोध, लालच सब समाप्त हो जाता है। सारा जगत ही प्रभुमय दिखता है, वैर किससे करें। सबमें तो निरंकार नजर आता है। श्री मद्भगवद्गीता में भी श्री कृष्ण ने जो संदेश दिया
यः माम् पश्यति सर्वत्र सर्वम् च मयि पश्यति।
तस्य अहम् न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति।। 6-30
जो मुझे सब जगह देखता है वह सबमें मुझे देखता है। पहले ज्ञान प्राप्त करने की बात कही है कि जब सर्वत्र निराकार दिखाई देता है, फिर हृदय में यह भाव बनते है। सब में परमात्मा का रूप नजर आने लगता है। ऐसे में भक्त का भगवान से अटूट रिश्ता हो जाता है। श्री कृष्ण जो कह रहे हैं कि ऐसे भक्त से मैं दूर नहीं होता, वो भी मुझसे दूर नहीं होता।
सत्गुरु माता जी कृपा करें, यह जो दात बख्शी है। इसका एहसास हर पल बना रहे और सुखों के धाम में सदा रहें।
जिस दे दिल निरंकार दा वासा।
हर दम वसे सुख दे धाम।।
जिस दे दिल निरंकार दावासा अवतार करे लख लख प्रणाम।
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Wednesday, May 22, 2019

हड़िया : झारखण्ड का अनोखा सर्वमान्य मादक पेय




हड़िया : झारखण्ड का अनोखा सर्वमान्य मादक पेय
झारखण्ड के वन-प्रांतर में रहने वाले जनजातीय एवं मूलवासी परिवारों में एक पारम्परिक पेय पदार्थ हड़िया के सार्वजनिक रूप से सेवन का प्रचलन सर्वमान्य है। इस पेय पदार्थ में उर्जा और मादकता स्तर पर हड़िया को मद्य निषेध कानूनों के दायरे से मुक्त रखा गया है। वस्तुतः हड़िया घर-धर में बनाया जाता है।
इसका मूल घटक चावल है, जो आसानी से उपलब्ध है। हड़िया बनाने की विधि बहुत अधिक जटिल नहीं होने से इसे तैयार करने में परहेज नहीं किया जा रहा है। वस्तुतः सीधे शब्दों में कहा जाए तो हड़िया चावल के भात से बनता है।

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